तो क्या करें
तो क्या करें
पानी से बुझ जाती है आग
पानी आग लगाए तो फिर क्या करें
जेठ का महीना तो तपता है
सावन आग लगाए तो फिर क्या करें
बड़ी उम्मीद थी तुम्हारे संविधान पर
तुम्हारा संविधान नाइंसाफी फैलाए तो फिर क्या करें
भगवान के नाम पर मर मिटे इंसान
इंसान न आए इंसान के काम तो फिर क्या करें
हर तरह के देखे, सुने, पढे हैं अपराध
धर्म के नाम पर शहर जल उठे तो फिर क्या करें
आग से पानी बुझाने का तुम्हारा खेल
तुम्हारे तमाशे ग़ज़ब हैं, कितना आश्चर्य करें
आजाद देश में डर डर कर जीना पड़े
तुम्हारे नए नए कानून का क्या करें
मसलों का कुछ हल होना चाहिए
तुम मसाला भरो मसलों में तो फिर क्या करें।
