सुहागरात
सुहागरात
शादी के बाद पत्नी जब पहली बार अपने कमरे में पति का इंतजार कर रही होती है उसके ऊपर क्या बीत रही है इन कुछ पंक्तियों में उसके मन की बात आप तक पहुंचा रहा हूं....
सात फेरों के बाद, आज पिया मिलन की रात होगी,
गोरी शर्मायेगी थोड़ा, फिर पिया की बाहें होंगी,
बांहों में भर लेंगे पिया जी फिर मन की सारी बातें होंगी,
यहां वहां छेड़ेंगे और न जाने क्या-क्या शरारतें होंगी?
गदगद हो रहा सोचकर मन और व्याकुल हो जाता है,
जाने पिया से कैसी यह पहली मुलाकात होगी?
फोन पर करते थे मीठी मीठी बातें आज आमने-सामने कितनी बातें होंगी?
क्या होगा उपहार मिलन का जब मुंह दिखाई की रस्म होगी ?
आते ही भर लेंगे मुझको बांहों में या फोन की तरह यहां भी उनकी कुछ शरारतें होंगी?
यह सोचकर देखे जा रही थी दरवाजा की कब उनके आने की आहट होगी?
छोड़ कर आई है जिसके लिए अपने माता -पिता बहन -भाई कैसी उस इंसान की फितरत होगी?
जिन अपनों को कल तक मानती थी अपना आज उनके लिए पराई होगी,
मिली नहीं कभी जिससे आज परछाई उसकी बनी होगी,
जिस तन मन को छुपाती आई हर किसी से आज वह तन मन मेरे पिया की अमानत होगी,
आ जाये पिया जल्दी से कब उनकी शक्ल प्यारी मेरे सामने होगी ?
सात फेरों के बाद, आज पिया मिलन की रात होगी।।
बहुत कुछ जद्दोजहद चल रहा होता है एक लड़की के मन में
जिन मां बाप ने पाला- पोसा जन्म दिया वह उनके लिए अचानक से पराई हो चुकी है।
मां बाप भाई -बहन जिस शरीर से हर किसी को बचाने के लिए कहते थे
आज वही शरीर एक अनजान आदमी आकर उस पर अपना हक जता रहा होगा ।
आज वही अनजान आदमी उसका सब कुछ हो जाएगा,
आज वही उसकी पहचान बन जाएगा अब उसका घर उसका नहीं रहा।
वहां वह पराई हो चुकी है जिस घर में आई है वहां वह सिर्फ बहू है
पति के नाम से जानी जाएगी। ससुराल वालों के नाम से पहचाने जाएगी ।
यह कैसी विडंबना है जो हर बार त्याग की बारिश सिर्फ और सिर्फ महिलाओं की आती है ।
शायद हर लड़की के यही हालात होते होंगे ।

