STORYMIRROR

Praveen Kumar Saini "Shiv"

Romance Classics Inspirational

4  

Praveen Kumar Saini "Shiv"

Romance Classics Inspirational

आंखों के आंसू

आंखों के आंसू

1 min
254

क्यों आंखों के आंसू रह रह के 

छलक जाते हैं 

वो बिते पल क्यों रह रह के

याद आते हैं 


बेबश लाचार क्यों हम हर

पल रह जाते हैं 

पास होते हुए भी जाने क्यों 

हम अकेले रह जाते हैं 

जिते जी शायद हम कदर 

नहीं कर पाते हैं 


तभी तो खोने के बाद 

सिर्फ रोते रह जाते हैं 

वक्त के धागे कैसे कैसे 

ताने बाने बनाते जाते हैं 


कभी जिंदगी की कड़वाहट 

कभी जिंदगी की मिठास

कैसे कैसे स्वाद हमारी जिंदगी 

में भरते जाते हैं।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance