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Meera Raikwar

Tragedy

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Meera Raikwar

Tragedy

सिसकी

सिसकी

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किसी दुख से

  विचलित हो

   रोता है अंतर्मन

    तो निकलती है सिसकी


मिलने की हो जब 

  प्रेमी से आकांक्षा

   हो न रहा हो मिलन

     तो निकलती है सिसकी


पहुंचे जब मन को

 किसी बात की चोट

   चोट मथता है

     तो निकलती है सिसकी


किया न हो 

 ऐसा कोई काम

  फिर भी लग जाये लांछन

    तो रोकर निकलती है सिसकी


तन मन का दर्द

  होती है सिसकी

   स्वस्थ तन मन की

     शुद्ध स्वच्छ होती है सिसकी



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