STORYMIRROR

Meera Raikwar

Tragedy

3  

Meera Raikwar

Tragedy

सिसकी

सिसकी

1 min
207

किसी दुख से

  विचलित हो

   रोता है अंतर्मन

    तो निकलती है सिसकी


मिलने की हो जब 

  प्रेमी से आकांक्षा

   हो न रहा हो मिलन

     तो निकलती है सिसकी


पहुंचे जब मन को

 किसी बात की चोट

   चोट मथता है

     तो निकलती है सिसकी


किया न हो 

 ऐसा कोई काम

  फिर भी लग जाये लांछन

    तो रोकर निकलती है सिसकी


तन मन का दर्द

  होती है सिसकी

   स्वस्थ तन मन की

     शुद्ध स्वच्छ होती है सिसकी



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy