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Shailaja Bhattad

Drama

5.0  

Shailaja Bhattad

Drama

शिव- अर्पण

शिव- अर्पण

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जपत निरंतर शिव का नाम,

सुमिरन हर पल त्रिलोकिनाथ।

जब मन मंदिर में वास है शिव का।

काम ,क्रोध, मद मोह है किसका।

भव सागर से सब तर जाते ,

जब नित्यानंद में खो जाते।

शिव चरणों में ध्यान लगाएँ,

जिससे जीवन लक्षित हो जाए।

हे डमरू वाले जगत-पिता ,

हे त्रिनेत्र महेश्वर मल्लिकार्जुना।

शरण तुम्हारी आए हैं,

श्रद्धा सुमन लाएँ हैं।

त्रिपुरारी त्रिलोकिनाथ,

डमरूवाले तुझे कोटि प्रणाम ।

तेरे चरणों में चारों धाम ,

रोम-रोम में है शिव नाम ।

शिवोहम,शिवोहम,

शिव है जीवन शिवो हम।

सर्वव्यापक तू सर्वगुणी,

तेरी भक्ति से है शक्ति हरघड़ी।

सकल दुःख संताप हरता,

हे जगत कल्याण कर्ता।

सिध्देश्वर, विश्वेश्वर ,

है तू सबका पालनकर्ता।

तेरी शीतल छाया में है मुक्तिधाम,

शिव धुन बजे ,

ले हरपल शिव का नाम।

हे महिमा तेरी न्यारी ,

हे दया के सागर ,

तेरी भक्ति बड़ी निराली।

तेरे चरणों में मुक्ति धाम,

शिश नवाऊँ, लूँ शिव का नाम।

गंगाधराय, भोले सोमेश्वराय,

कण कण में रमते विश्वनाथाय।

नीलकंठ है जगतपिता ,

हर-हर भोले शिवा शिवा।

शिव धुन है सात सुरों की सरगम,

सत्यम् शिवम् सुंदरम।

हे भुवनेश्वर मैं नतमस्तक,

कर कमलों से अर्पित करुणा अमृत ।

परमसुंदर रूप,अद्भुतवाणी,नृत्य अद्भुत ।

है अद्भुत सब अद्भुत अद्भुत ।

महिमा तेरी गहरी है ,

सर्वत्र शिव भक्ति की लहरी है।

तेरे संस्मरण से हुई संस्कृति गौरवान्वित,

तेरे ही प्रेम से है सभी आच्छादित ।

देवों के देव विश्वेश्वराय,

भज हरिओम नमः शिवाय।

हर हर भोले गंगाधराय,

कण कण में रमते विश्वनाथाय ।

हर हर महादेव शिवशंभो,

रोम रोम में है नमो नमो।

वंदन भोले गौरीशंकर,

शिशनवाऊँ शिवभक्ति पाऊँ।

हे प्रजापालक जगसंचालक,

सर्वशांति सर्वसुख की तुझसे कृपा पाऊँ।

सिद्ध सन्यासी कैलाश निवासी ।

हे अविनाशी अभयंकर,भीमाशंकर नागेश्वर।

हे भाग्यविधाता ,

जग के दाता आदिश्वर ।

है गणेश, कार्तिकेय के प्यारे,

प्रभु जग में सबसे निराले।।


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