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Shailaja Bhattad

Abstract Inspirational

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Shailaja Bhattad

Abstract Inspirational

सबकी होली

सबकी होली

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होली जो मिलने आई है। भर-भर उपहार लाई है। मेल-मिलाप करती है सबसे। फिर हो लेती सबके संग में। रंग ही रंग बिखेर दिए हैं। रंग-बिरंगे रिश्ते किए हैं। खुशी भी अब कहाँ छुपी है। आँख मिचौली छोड़ चुकी है। लाल गुलाबी चेहरों पर, जगह अपनी ले चुकी है। शांति भी तो साथ आई है। मधुर स्पर्श प्रकृति का लाई है। राग बसंत की धूम मची है। कुमकुम केसर ने महक रची है।
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 झांझ मंजीरे की ताल पर रंग सारे थिरकने लगे। क्या बच्चे, क्या युवा, बुजुर्ग भी झूमने लगे। ढोलक की थाप पर फाग ने सुर लगाए हैं। रंगों के मेलजोल ने कई इंद्रधनुष बनाए हैं।
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देख रिश्तो में आई गहराई। होली है आज मुस्काई। आना हुआ सफल मेरा। समरसता की बात सिखाई।


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