सत्संग
सत्संग
===== 1. सत्संग किया कर पल-पल में। स्वज्ञान तेरा दिख जाएगा। भक्तों की भक्ति सीढ़ी है। संसृति से मुक्ति पाएगा ======= 2. आनंदित चित्त जीवन उत्सव मन स्पंदित हो जावेगा। भज ले मन असुरारी को। पार कलि कर जाएगा। ======= 3. प्रेम समर्पण शक्ति है। साक्षात प्रभु की भक्ति है। रस लेकर सेवा करते रहो । अंतस निर्मल हो जाएगा। ====== 4. दीपक की लौ फिर बढ़नी है। चिंतन संवर्धित होना है। रघुवर को पल-पल भजते रहो। अनंत लीन हो जाएगा।// प्रभुपाद शीश नवाएगा// // निर्मल चित्त हो जाएगा। ========
