जयश्री राम
जयश्री राम
शक- संशय छूटते चले, ध्यान में हरि ही रहे।
प्रभु सेवक मुझे बना लो बस इतनी-सी है प्रार्थना।
नव प्रकाश उदित हुआ है, ध्यान भी गहरा हुआ है।
भक्ति का मार्ग दिखा दो बस इतनी-सी है प्रार्थना।
प्रभु नाम में लिप्त रहूँ, चित्त अपना शुद्ध रखूँ।
महती कृपा कर डालो प्रभुजी, बस इतनी-सी है प्रार्थना।
दृष्टि में असीम हैं, विराट प्रभु स्वरूप है।
अनथक पुलकित लीन रहूँ मैं, बस इतनी-सी है प्रार्थना।
पुण्य प्रबल प्रभाव है परिपूर्णता का भाव है।
आत्मा की गहराई में रचा बसा प्रभु धाम है।
गहन प्रीति हो जाए प्रभु से, बस इतनी सी है प्रार्थना।
डॉ शैलजा भट्टड
