जयश्री राम
जयश्री राम
शक- संशय छूटते चले, ध्यान में हरि ही रहे।
प्रभु सेवक मुझे बना लो बस इतनी-सी है प्रार्थना।
नव प्रकाश उदित हुआ है, ध्यान भी गहरा हुआ है।
भक्ति का मार्ग दिखा दो बस इतनी-सी है प्रार्थना।
प्रभु नाम में लिप्त रहूँ, चित्त अपना शुद्ध रखूँ।
महती कृपा कर डालो प्रभुजी, बस इतनी-सी है प्रार्थना।
दृष्टि में असीम हैं, विराट प्रभु स्वरूप है।
अनथक पुलकित लीन रहूँ मैं, बस इतनी-सी है प्रार्थना।
पुण्य प्रबल प्रभाव है परिपूर्णता का भाव है।
आत्मा
