STORYMIRROR

Shailaja Bhattad

Abstract

4  

Shailaja Bhattad

Abstract

जयश्री राम

जयश्री राम

1 min
11

शक- संशय छूटते चले, ध्यान में हरि ही रहे।
 प्रभु सेवक मुझे बना लो बस इतनी-सी है प्रार्थना। नव प्रकाश उदित हुआ है, ध्यान भी गहरा हुआ है। भक्ति का मार्ग दिखा दो बस इतनी-सी है प्रार्थना। प्रभु नाम में लिप्त रहूँ, चित्त अपना शुद्ध रखूँ। महती कृपा कर डालो प्रभुजी, बस इतनी-सी है प्रार्थना। दृष्टि में असीम हैं, विराट प्रभु स्वरूप है। अनथक पुलकित लीन रहूँ मैं, बस इतनी-सी है प्रार्थना। पुण्य प्रबल प्रभाव है परिपूर्णता का भाव है। आत्मा 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract