ओम नमः शिवाय
ओम नमः शिवाय
पंचामृत से अभिषेक कर भक्ति की ज्योत जलाई है।
किया अनुष्ठान विधि-विधान से अंतर में रिक्तता आई है।
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डमरू ध्वनि सृष्टि में गूँजे, ईश्वरत्व का भाव भरे।
आध्यात्मिक यात्रा पर निकले हैं, आत्मिक उद्धार प्रभु करें।
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संयम का आभूषण पहन, शिव पूजा में आए हैं।
बेलपत्र धतूरा अर्पित, ईश्वर को शीश नवाए हैं।
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जागृति की रात्रि आई, महाशिवरात्रि मनाई है।
मौन धैर्य समर्पण संयम, आस्था की गहराई है।
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शुद्ध चेतन सत्ता हूँ, यह विवेक प्रभु देना मुझे।
सहज सरल स्वरूप प्रभु का, प्रभु मर्म यह देना मुझे।
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जाग्रत करती विवेक, शिव की भक्ति। शांति में शक्ति है, शक्ति का संचयन कराती।
संतुलित यह जीवन बनाती।
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शांति का विस्तार है ओम नमः शिवाय। शिव का अनुष्ठान है ओम नमः शिवाय। आत्मिक उत्थान है ओम नमः शिवाय। पोषण का प्रतीक है ओम नमः शिवाय। संतुलन का ध्यान है ओम नमः शिवाय। सृष्टि का पुनरुत्थान है ओम नमः शिवाय।
आत्मज्ञान का वरदान है ओम नमः शिवाय।
डमरू का नाद है ओम नमः शिवाय। ईश्वरत्व की पूर्णता ओम नमः शिवाय। विरक्ति का भाव है ओम नमः शिवाय। जागृति का गान है ओम नमः शिवाय। संतुलन का सूत्र है ओम नमः शिवाय। जग का उद्धार है ओम नमः शिवाय। इष्ट का ध्यान है ओम नमः शिवाय। रिक्तता का उत्सव है ओम नमः शिवाय।
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शिव भक्ति में सन्नद्ध जब, अहंकार सहज तज जाता है।
समर्पित भक्ति के आलोक में अभय वर मिल जाता है।
भक्ति की धारा बही है अध्यात्म का सुख बस यही है।
मंदिर की घंटी कानों में रस घोले।
डमरू का नाद सुन, भक्त भक्ति रस में डोले।
