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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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शिव-शिव

शिव-शिव

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1. सुंदर गुणों के स्वामी बिन भाव वरण कहाँ है। शिवकल्याण करेंगे भक्ति में शरण जहाँ है। 2. शुद्ध चेतन सत्ता शिव का नाम अमर है। डमरू नाद हितकारी, [[संयम ही आभूषण है// मन में नहीं समर हैं।]] महिमा तेरी है न्यारी, काम मोह कब रहा है। 3. रोम रोम शिव गाथा, अलख जगाई ऐसे। उत्थान हो हमारा, फूलों में महक हो जैसे। पूजा में दीप सजा है, दिन भी ढला कहाँ है। (( बजती है खूब ताली, भव से तर जाता है // शिव ही वरदाता है।)) 4. शिव शंभो को नमन है तेरी भक्ति बड़ी निराली। आडंबर न पूजा जल बेलपत्र ही काफी। सच्चे मन का समर्पण गुरु ज्ञान तब ही मिला है। 5. बिन डोर मन पतंग सा, यहाँ-वहाँ भटक रहा था। ठौर मिली जब शिव की, मन पुलकित हुआ है। अंतर्मन का अंधेरा, अब छट गया है। जागृत हुआ है चेतन, उत्कृष्ट आदर्श बना है।


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