STORYMIRROR

सोनी गुप्ता

Tragedy Inspirational

4  

सोनी गुप्ता

Tragedy Inspirational

सड़क पर बचपन

सड़क पर बचपन

1 min
305

कल जा रहा था अपनी राह

सहसा नजर पड़ी सड़क के किनारे

एक बालक गाड़ी का शीशा पकड़

कुछ मांगता हुआ गिड़गिड़ा रहा था


पूछा क्यों तुम रोज भीख मांगते हो

लोगों के आगे क्यों गिड़गिड़ाते हो

समझ नहीं पाया मेरी बातों को

सर अपना खुजलाया और फिर बोला


दे दो न साहब क्यों बातें बनाते हो

मैंने कहा सुनो एक बात मेरी

मुझे बताओ क्या तुम्हारी मज़बूरी है

क्यों पढ़ने नहीं जाते हो रोज यहीं सड़क पर मिल जाते हो


साहब स्कूल जाऊँगा तो रोटी कैसे खाऊंगा

माँ की दवा कहाँ से लाऊंगा

बाबा के पैरों का इलाज कैसे करवाऊंगा

रोज कुछ मिलता है तब सबका पेट भरता है


पढ़ना मुझे भी अच्छा लगता है

मन में सोचता हूँ मैं भी स्कूल जाऊँगा

बस्ता अपना रोज मैं सजाऊंगा

पर घर की हालत देख घबराता हूँ

इसलिए रोज सड़क पर आ जाता हूँ


बातें उसकी सुन दिल मेरा रोया था

उस बच्चे ने ओर न जाने कितने ही बच्चों ने

सड़कों पर अपना बचपन बिताया था

वो पल आज याद करता हूँ

तो दिल घबरा जाता है

इनकी मदद करने इंसान कभी-कभी

ईश्वर बन जाता है III  


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy