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Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Tragedy

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Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Tragedy

सब के नसीब में कहाँ होता है सुखी संसार।"

सब के नसीब में कहाँ होता है सुखी संसार।"

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सबकी आंखों में होता है सपनों का अंबार,

करने को साकार मेहनत करते है लगातार।

तकदीर सब की कहा एक जैसी होती है!

किसी को जीत मिलती है तो किसी को हार।

प्रयास करते है फिर भी नहीं मिलती मंजिल,

सबके नसीब में कहाँ होता है सुखी संसार।

सबके दिल में आसमां छूने का होता है अरमान

पर सबको नहीं मिलता सब का सहकार।

हर घड़ी हर पल टूटता है विश्वास उनका,

जिनको दुनिया में किसी का नहीं होता आधार।

किसी को मिलती चादर फूलो की तो किसी को कांटों की,

कहा होती है दुनिया में सबकी एक जैसी तकदीर।



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