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Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Tragedy

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Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Tragedy

"उसे ढूंढकर ला दोगे क्या?"

"उसे ढूंढकर ला दोगे क्या?"

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दुनिया की भीड़ में खो गया अपनापन,

ढूंढकर ला दोंगे क्या?

जवाबदारी के बोझ तले दफन हो गई इच्छाएं,

क्या फिर से जीवंत कर सकोगे क्या?

परिवार की जिम्मेदारी में खो गई जवानी,

वो समय वापिस ला देंगे क्या?

पता नहीं मुझसे रूठ गई मेरी किस्मत,

उसे मना सकोगे क्या?

दुनिया की शोरबकोर में खो गई आवाज मेरी,

उसे वापिस ला दोगे क्या?

दुनिया के तानो से टूट गया मेरा हौसला,

नई आशा नए उमंग दोगे क्या?

मैं जिंदा हूँ पर मर गया मेरा उत्साह,

उसे फिर से जिंदा कर सकोगे क्या?

स्वार्थ भरी दुनिया में खो गए मेरे अपने,

उसे ढूंढकर ला दोगे क्या?



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