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Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Abstract Inspirational

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Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Abstract Inspirational

"फूल तो है ईश्वर का लिखाहुआ खत।"

"फूल तो है ईश्वर का लिखाहुआ खत।"

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ना जाने कौन सा जादू है तेरी कुदरत में,

लगता है सब कुछ बनाया तूने फुरसत में।

सारे आलम को दुल्हन की तरह सजाया,

लगता है जैसे प्रकृति को तूने नींद से जगाया।

बारिश की बुंदे सब को चढ़ाती है नशा,

सूरज की किरणें जगाती हैं नई आशा।

सारे फूल लगते है जैसे तूने लिखा हमें खत,

फूल की खुशबू जगाती है हमें दिल में लगन।

जैसे जमी सिखाती है तकलीफ में सब्र करना,

पर्वत सिखाता है हमें ऊंचे ख्वाब रखना।

गिरते पते सिखाते है हमें जीवन का राज,

धीरज रखने वाला पहनता है सफलता का ताज।

कोहरा सिखाता है हमें चलते ही रहना,

खुदा अपने साथ है ऐसा हमेशा याद रखना।

अंधेरों को चुनौती देता है चमकता चांद,

करना ऐसा काम, लोग करे तुम को सदा याद।

तू भी जीत लेगा एक दिन जीवन की बाजी,

कर ऐसा काम तू, रब हो जाए तुझ से राजी।



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