STORYMIRROR

DREAM ART

Tragedy

3  

DREAM ART

Tragedy

"पढ़ना चाहे एकलव्य "

"पढ़ना चाहे एकलव्य "

1 min
386

राज गुरु हुए द्रोण से,किया शिष्यों से हेज।

पढ़ना चाहे एकलव्य, खूब किया परहेज।

खूब किया परहेज, महारथ तब खूब लजा।

हुनर से कुशल बना, मनोरथ की हुई सजा।

कह "जय"करो ख्याल, मेहनत से पहन ताज।

आज भी असंख्य गुरु,चला रहे हैं छद्म राज।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy