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Anand Kumar

Drama

4.3  

Anand Kumar

Drama

रूह आज़ाद है तेरी

रूह आज़ाद है तेरी

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बोल ले, जो लब आज़ाद हैं तेरे

लिख ले, अगर कलम आज़ाद है।


भर दे रंग कोरे कागज़ों पर,

जो सोच आज़ाद है तेरी।


फिर बिखेर दे उन रंगों को

जीवन में अपने,

जो रूह आज़ाद है तेरी।।


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