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आनंद कुमार

Abstract Romance

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आनंद कुमार

Abstract Romance

प्यार नजर आता है

प्यार नजर आता है

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हो सकता है, हों तेरे दिल में कोई झूठ फरेब मगर, 

फिर भी तेरी आंखों में मुझे बस प्यार नज़र आता है।


हमको छोड़ कर चलें ही जाओगे, बेवफा इश्क हों तुम, 

ये हमें तुम्हारे इरादों में साफ नजर आता है।


टूट जाना है इस ख्वाब को भी एक दिन ,

मगर फिर भी तुम में हमें महताब नजर आता हैं।


चंद लम्हे गुजारें हैं जो हमने तुम्हारे साथ ,

उन में हमें जिंदगी का सार नजर आता है।


पता है हमको अच्छी तरह की बेवफा हो तुम,

फिर भी तुम में बेपनाह प्यार नजर आता है।


मजबूर हैं हम क्योंकि इश्क़ किया है बेइंतहा तुमसे ,

इसलिए मौत में भी जिंदगी सा अधिकार नजर आता है।


पता है कि तुम बेवफा हो, चले जाओगे एक दिन फिर भी,

ना जाने क्यों तुम में एक अजीब सा क़रार नजर आता है।


तुम मेरी मोहब्बत हों या मेरी जरूरत हो, पता नहीं? 

मगर तुम में, मेरी आदत बनने का आसार नजर आता हैं।


तुम्हारी आंखों में मेरे लिए मोहब्बत ना होगी कभी मगर,

मेरे दिल में तुम्हारे लिए आज भी खुमार नजर आता है।


बेवफा से बेइंतहा इश्क किया तुमने, कहेगा ज़माना हमसे,

क्या बताऊं, तुम में मुझे भूला-बिसरा संसार नजर आता है।


तुम्हारे आने की झलक नहीं मिलेगी हमें किसी दिन,

फिर भी हमारी पलकों में तुम्हारा इख्तियार नजर आता हैं।


तुम्हारी आहट से फिर कभी रूबरू नहीं होंगे हम ,

फिर भी तुम्हारी बातों में हमें एतबार नजर आता है।


मोहब्बत के तिलिस्म में उलझा हुआ हूं इस तरह से कि,

मुझे मेरे क़ातिल की पलकों में मेरा दीदार नज़र आता है।



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