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Gopal Agrawal

Abstract

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Gopal Agrawal

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क्या आप सपने देखते हैं....

क्या आप सपने देखते हैं....

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क्या आप सपना देखते हैंं

देखते हैंं तो कैसा सपना,

छोटा सपना या बड़ा सपना,

दूसरो के लिए या फिर खुद का सपना,

हमने तो यह सुना हैं,

ये नया जमाना हैं साहब,

अब यहां पर अब छोटे नहीं,

बड़े सपने देखे जाते हैंं,

सपनो को पूरा करने के लिए,

अपने ही छले जाते हैंं,

क्या कभी देखा हैं कि,

कोई आदमी ईमानदारी से,

देखे अपने सपने को,

पूरा करने के लिए जुटता हैं,

बिलकुल नहीं,

अब ईमानदारी में तो,

पेट भी नहीं भरता दिखता हैं,

तभी तो लोगों ने,

छोटी आंखो से,

शुरू कर दिया हैं बड़े सपने देखना,

बिना बात के बड़ी बड़ी फैंकना,

ये वो ही लोग हैं,

जो मुफलिसी के दौर में भी,

जब ईमानदारी होना चाहिए,

उसे छोड़कर,

बिना आग के ही रोटी सैंकते,

जहां पर काम निकालना है,

वहां पर बड़ी बड़ी फैंकते हैं,

नई नई तरकीबें लगाते हैं,

बड़ी बाते छोड़ जाते हैं,

ऐसे समझदार होते हैं,

जो घर के गेड़े से ही,

अपनी आंख फोड़ जाते हैं।

खुद का सपना अधूरा छोड़ जाते हैं,

(गेड़ा- पुराने खपरैल मकान में निकली एक लकड़ी

जिससे टकरा कर आंखे फूट जाती हैं एक कहावत

खुद का नुकसान करना)


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