STORYMIRROR

आनंद कुमार

Romance

3  

आनंद कुमार

Romance

तूं मेरी हो गई है।

तूं मेरी हो गई है।

2 mins
14

टुकड़े में जीने की आदत सी हो गई है, 

तूं नहीं है मगर,

तुझ से चाहत हो गई है।


दुनिया बहुत ज़ालिम हो गई है,

मेरी दुनिया तो तूं थी, 

मगर तूं भी अब दूसरों में शामिल हो गई है।


कितना चाहकता था,जब तेरे पास था,

जिंदगी जी थी तेरे साथ,

अब तेरी आदत हो गई है।


तेरे आने या जाने का ग़म रोज़ सताता है,

अब तूं, तूं बनकर मेरी हो गई है।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance