STORYMIRROR

Sudhirkumarpannalal Pratibha

Abstract Inspirational

4  

Sudhirkumarpannalal Pratibha

Abstract Inspirational

नारंगी रंग शब्द की सीमा

नारंगी रंग शब्द की सीमा

1 min
411

जो मैं सोचता हूं

तुम्हारे बारे में

जो मैं अनुभव

कर पाता हूं

अपने प्यार के बारे में

वो बता नही पाता हूं


उसे जिससे मैं

बेहद प्यार करता हूं

उसे जिसे मैं बेहद चाहता हूं

उसे जता नहीं पाता हूं

और जताने की कोशिश

करता हूं तो

खुद को हीं अधूरेपन का

अहसास होता हैं


तो क्या मेरे पास

शब्दशक्ति की कमी है

या फिर शब्दो की 

अपनी एक सीमा हैं

क्योंकि अपने प्यार की

असीमित गहराइयों के

भीतर से निकली

अनुभूतियां

को शब्दो को

जोड़कर

वाक्य बनाना


फिर भी

उस अनुभूतियों को 

पूर्ण परिभाषित

नहीं कर पाना

और एक असफल

कोशिश करना 

इसके बाद भी

इस वाक्य से

निकले अर्थ से

खुद को हीं संतुष्ट

नहीं कर पाना


क्या दर्शाता है

या तो मेरे पास

शब्द का अभाव है

या फिर शब्दों की

हैसियत हीं नहीं है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract