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Kanchan Prabha

Classics Fantasy

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Kanchan Prabha

Classics Fantasy

प्रथम बारिश की बूँदें

प्रथम बारिश की बूँदें

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प्रथम बारिश की बूंदें 

जब कोमल लताओं से लिपट कर 

गिरती है पलकों पर 

अनोखा एहसास दे जाती है


आसमान छूने की

अतीत की मधुर यादें

नीरद की तरह बरसता है

प्रथम बारिश की बूँदें 


जब कोमल लताओं से लिपट कर 

गिरती है पलकों पर 

दामन से निकल कर एक तरंग

विलीन हो जाता है शुन्य में 

चंचल मन में पूर स्वप्न का

उमड़ता है गुजरता है 


प्रथम बारिश की बूँदें 

जब कोमल लताओं से लिपट कर 

गिरती है पलकों पर 

पिक की मधुर गुंजन से

हृदय विचलित होने लगता है


किसी प्रणय निवेदन की आश

रंगने लगती है मुझे अपने ही वर्ण में।


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