STORYMIRROR

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Tragedy

4  

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Tragedy

नयी उम्मीद

नयी उम्मीद

1 min
310

सूरज की पहली किरनें नयी उम्मीद लेकर आती हैं,

तेरे वापस आने का मुझे हर पल इंतजार रहता है।


रोज सुबह मन में तेरी यादों का मौसम छा जाता हैं,

तेरा चेहरा देखने के लिये मेरा दिल मचल जाता है।


दोपहर के समय मैं जब धूप मुझे परेशान बनाती हैं।

तब तेरी जुल्फों की शीतल छांँव मुझे याद आती हैं।


शाम का ये हसीन नजारा मेरे मन को बहला देता हैं,

तेरा साथ पाने के लिये मुझ में मायूसी छाई रहती है।


जब जब रात होती हैं, तेरे प्यार की प्यास लगती हैं,

तुझे बांहों में सिमटने के लिये मदहोशी छा जाती हैं।


न सताओ सनम अब ये दिल की दूरी मुझे मिटानी हैं,

"मुरली" की ये जिंदगी अब पतझड़ बनी जा रही हैं।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama