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अंकित शर्मा (आज़ाद)

Abstract Inspirational Others

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अंकित शर्मा (आज़ाद)

Abstract Inspirational Others

नव वर्ष

नव वर्ष

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कहां पता सूर्य को

कि कौन से दिन को पहला कहता है आदमी,

धरती के कौन से फेरे को, ‘एक’ कह कर कब से गिन रहा है,

क्यों कि 

जब गिनती नहीं थी,

आदमी भी नहीं था,

तब भी 

सूर्य था

ये फेरे थे

दिन था

सबेरे थे


फिर भी चलो,

आदमी मुस्कुराया तो,

कोई परिक्रमा ऐसी भी है

कि वो सबके साथ आया तो


सूर्य तो वही है 

धरती का वेग वही है

दिन वही है

रात वही है

पर सब अब कह रहे नया साल आया है,

नए वादे नई उम्मीदें साथ लाया है।

अच्छा है

मैं भी साथ झूम लेता हूं,

लालिमा आकाश की

पहली कह कर चूम लेता हूं,


नूतन वर्ष का हृदय से अभिनंदन है,

जो बीता हर एक पल उसे वंदन है

हाथ छूटे नहीं बस यूं थामना है,

हर आने वाले क्षण को शुभकामना है


नए वर्ष की हार्दिक बधाई 




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