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अंकित शर्मा (आज़ाद)

Abstract Inspirational Others

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अंकित शर्मा (आज़ाद)

Abstract Inspirational Others

व्यवस्था

व्यवस्था

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हो बस जय जयकार गीत की,

गायक सब बिसराने होंगे,

करनी होगी बात कर्म की,

कर्ता सभी भुलाने होंगे,

सत्य सदा से एक

फिर कहने बाला कहां बड़ा,

वह बात बड़ी जो कही गई,

वह बड़ा बना जहां सत्य खड़ा

है बड़ी व्यवस्था व्यक्ति से,

सो चेहरे सभी धुंधलाने होंगे,

हो बस जय जयकार गीत की,

गायक सब बिसराने होंगे,

करनी होगी बात कर्म की,

कर्ता सभी भुलाने होंगे,



स्वर्ण नहीं डरता, अग्नि की

कोई परख लेकर देखो,

नहीं बदलते गुण दोष धर्म,

कोई ताप देकर देखो,

ढाले कोई कोई पहने,

कोई भी फर्क नहीं पड़ता,

कीमत सोना हो जाने में,

गहने कोई भी गड़ता।

सो आभूषण की कीमत गढ़ते

स्वर्णकार झुठलाने होंगे

करनी होगी बात कर्म की,

कर्ता सभी भुलाने होंगे,

हो बस जय जयकार गीत की,

गायक सब बिसराने होंगे।


खेले देखे हैं बड़े बड़े

बहुत अग़ाड़ी देखे है

बन भगवन पूजे जाते

बहुत खिलाड़ी देखें हैं

पर बड़ा खेल हर कीमत पर

जिसमें प्रतिमान गड़े गए

है ऊंचा सदा खेल खिलाड़ी से

जिसमें कुछ चुनकर पढ़ें गए

इसीलिए अब खेल खेल में

किस्से खेल के सुनाने होंगे

करनी होगी बात कर्म की,

कर्ता सभी भुलाने होंगे,

हो बस जय जयकार गीत की,

गायक सब बिसराने होंगे।


















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