परवरदिगार
परवरदिगार
मेरे टूटते ही सब
हिम्मत सार हो गए
मैं हुआ थोड़ा पागल
सब समझदार हो गए
मैं बेकरार घूमता था,
तब तल्ख निगाहें थीं,
मेरे फेरते ही नजरें,
सब बेकरार हो गए।
बड़े अनजान सब थे,
मुझसे अभी तक,
जो हम नदारद हुए
सब राजदार हो गए।
मैं रोज पूछता था,
हाले दिल उन्हीं से,
जो हम चुप हुए,
वो परवरदिगार हो गए।
