उम्मीद
उम्मीद
लौट आयेंगे परिंदे फिर से अपनी शाख पर,
कोटरों से सांप को पहले निकालो तो मगर,
मुस्कुराएंगी चमन में कलियां फिर से फ़ूल बन,
जड़ों में तेजाब है पहले उसको हटालो तो मगर
मस्कीन में दे तुम्हें सकता ख़ुदा सब कुछ तुम्हें आकर मगर
करके मकान को साफ तुम मस्जिद बनालो तो अगर
चल नहीं सकती कभी भी डर की हुकूमत देर तक
प्यार से इकरार से सबको संभालो तो मगर
न टूटोगे फिर से दोबारा शोर से इस भीड़ के
आवाजों जहन को तरक्की का जरिया बना लो तो मगर
