STORYMIRROR

राही अंजाना

Drama

2  

राही अंजाना

Drama

नशा

नशा

1 min
193


ताबिश ए जलन ने जला कर रख दिया,

भीतर ही भीतर मुझे गला कर रख दिया।


फूँकता रहा हवा जिस चिंगारी में हर दिन,

उसी धुँए ने फिर मुझे घुला कर रख दिया।


मोहब्बत किसको कितनी थी मालूम हुआ,

जब नशेमन ने 'राही' सुला कर रख दिया।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama