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Kishan Negi

Tragedy Inspirational

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Kishan Negi

Tragedy Inspirational

नारी हूं तेरी गुनहगार नहीं (काला रंग)

नारी हूं तेरी गुनहगार नहीं (काला रंग)

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अतीत की किताबों के कोरे पन्नों में

बेमकसद उतरने की तू कोशिश ना कर

आसमां में उड़ने का अजीब जुनून है मुझमें

मेरे ख्वाबों को कुतरने की तू कोशिश ना कर


जब भी देखती हूँ बादलों को मचलते हुए

नामालूम क्यूं ज़मीं पर पड़ते नहीं है पाँव मेरे

खुशनुमा सावन से है करती हूं यही गुज़ारिश

फुरसत में ठुमक कर आना कभी मेरे गाँव में 


मन में छाई लालिमा भी ताने मारकर कहती है

पगली कभी इश्क मोहब्बत की भी बात किया करो

इन आंखों में मचल रही है तरुणाई की तरंगें

प्रेम का दीया जला कभी उजाली रात किया करो


मेरे लालित्य पर ज़माने को भी देखा है मरते हुए

एक तू है देखा नहीं जिसने अब तलक नज़र भर

क्या कमी थी मेरे प्यार में ज़रा मैं भी तो जानूं 

जिधर तू चला है चली मैं भी अब उसी डगर पर


स्त्री हूँ तो क्या कोई गुनाह तो नहीं किया है 

मेरे स्त्रीत्व को आजमाने की हिमाकत मत करना

इसकी चिंगारी में ख़ाक हो जायेगा अहंकार तेरा

मेरे अस्तित्व से टकराने की हिमाकत मत करना।



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