शरीफ़
शरीफ़
करोड़पति बन गया मैं, कुछ कौडिय़ां इकट्ठी कर ली !
औने/ पौने दाम पर ख़रीदे सच्चे रिश्ते ,
लाखों की झूठी इमारत खड़ी कर ली ।
महफ़िलों में मेरा ख़ासा ज़िक्र होता है ,
उस ज़िक्र पर मुझे फ़क्र होता है ।
लाल रंग से सजी गाड़ी मुझे है पसंद ,
लाली में जिसकी बेगुनाहों का खून भी है शामिल।
बेशर्मी की सारी हदें पार कर ,
अब बैठा हूँ शरीफ़ बन कर ।
