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Dr Jogender Singh(jogi)

Abstract

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Dr Jogender Singh(jogi)

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दूर नहीं तू

दूर नहीं तू

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सूरज की रोशनी तू ।

चाँद की ठंडक भी तू !

मेरे हर ख़्वाब की हक़ीक़त,

 हक़ीक़त का ख़्वाब भी तू।


हालात पर मेरे न आँसू बहाना —

जज़्बात पर तू अपने क़ाबू पाना। 

 मैं रो लूँगा तेरे हिस्से का भी,

यह राज पर किसी को न जताना।


रोशनी दूर है,तो दूर ही सही, 

दिलासा मन का, कुछ चैन तो मिल जायेगा।

तू दूर नहीं, मेरे पास ही है

तेरा अहसास, तो मेरे पास ही है। 


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