ना बढ़ाओ दर्द मेरा....
ना बढ़ाओ दर्द मेरा....
ना बढ़ाओ दर्द मेरा,
तुम यूं ख़ामोश रहकर ....
कुछ तो लबों से बोलो
कुछ दर्द - ए - दिल बयां करो तुम ....
है दर्द का यह दरिया,
आँखों से अश्क बनकर ....
बह जाने दो आज इनको,
अश्कों के साहिलों पर .....
ना बढ़ाओ दर्द मेरा,
तुम यूं ख़ामोश रहकर .....
हर तरफ सजी है,
रंग और नूर की महफिल,
छाई हर कहीं है .....
ख़्वाबों और खयालों की खुमारी,
खामोश तुम ना बैठो .....
ना ओढो उदासियों के बादल,
बरस जाओ ऐसे ......
बारिश की बूंदें बन कर,
ना बढ़ाओ दर्द मेरा,
तुम यूं खामोश रहकर ....
तोड़ कर जंजीरे,
तुम आज अपनी खामोशियों की,
निकालो ख़ुद को बाहर ....
अल्फाज़ नए बन कर,
ना बढ़ाओ दर्द मेरा,
तुम यूं ख़ामोश रह कर.....
मैं खड़ा हूंँ साथ हर दम,
हम साया तेरा बनके,
ले लो साथ अपने .....
मुझे अपना हम ज़ुबां समझ कर .....
ना बढ़ाओ दर्द मेरा,
तुम यूं ख़ामोश रहकर....
अपराजिता......
