STORYMIRROR

मत खेल जल जायेगा

मत खेल जल जायेगा

1 min
457


आग से मत खेल

जल जायेगा

घर से भी बेघर हो जाएगा

कब और कहाँ जायेगा।


वहां भी तू मारा जायेगा

अपनों को भी

नहीं पहचान पायेगा।


पत्थर मारकर तू

कहाँ दुबक जायेगा

वहीं से भी तू खींचकर

लाया जायेगा।


और बेमौत मारा जायेगा

आग से मत खेल

जल जायेगा।


घर से भी बेघर हो जायेगा

कहता है तू मुझे

आजादी चाहिए,


आजाद है तभी तो

पत्थर मारता है तू

होता कैदी

साँस भी नहीं ले पाता तू।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama