STORYMIRROR

मसीहा को ढाला जा रहा है

मसीहा को ढाला जा रहा है

1 min
696


मैंने वो साँचे देखे हैं, जिधर,

मसीहा को ढाला जा रहा है।


मैं उन क्रॉस को देख चुका हूँ,

जिस पर मसीहा को लटकाया जा रहा है।


वो सारे साँचे बेकार हो चुके हैं,

जिससे मसीहा को ढाला जा रहा है,


सारे क्रॉस सोने चाँदी में जड़ चुके हैं,

जिस पर मसीहा को लटकाया जा रहा है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy