STORYMIRROR

Sakshi Mutha

Romance

2  

Sakshi Mutha

Romance

मोहब्बत

मोहब्बत

1 min
221

सलीका हो अगर भीगी हुई आँखो को पढ़ने का

तो बहते हुए आँसू भी अक्सर बातें करते है


सच्ची मोहब्बत को शब्दों की क्या जरुरत

खामोशीयों से भी मोहब्बत का

हक़ अदा किया करते हैं

इश्क़ में भूलकर वजूद अपना

जाने अनजाने ही सही

एक दूजे की परवाह कर लिया करते है


उम्मीद भी ना हो पाने की

फिर भी राह तकती नज़रें

इंतजार की हद तक

उनके आने का इंतजार कर लिया करते है



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance