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Sakshi Mutha

Abstract


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Sakshi Mutha

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यादें

यादें

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समेट लेना चाहती हूँ तेरी हर यादों को

की जिन्दगी तेरी यादों के साथ आसान लगे

झगड़ ही सही मुझसे तू,

बातें होने के कुछ आसार तो लगे


ना तेरे पास मेरे लिए वक़्त है

ना ही मैं तेरी जिम्मेवारी हूँ

पर मेरे हर श्रृण में तुम ही हो


जितना भी वक़्त तुने दिया उसकी मैं आभारी हूँ

तेरी जिन्दगी के कुछ उसूल मुझसे अलग है

तेरी कुछ आदत अपना लू तो क्या गलत है


तेरी आदतों के साथ जिन्दगी आसान लगे

साथ तेरे होने के कुछ तो आसार लगे।


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