STORYMIRROR

Sakshi Mutha

Inspirational

4  

Sakshi Mutha

Inspirational

जिंदगी

जिंदगी

1 min
204

रस्सी जैसी जिंदगी तने तने हालात

एक सिरे पर ख्वाहिशें, दूसरे पर औकात

उम्मीद का दामन थामे,ढल रही हर शाम

माथे पर शिकन, होंठों पर मुस्कान

ना कोई धर्म, है ना कोई जात

दो रोटी की भूख, दो निवाला भात

मिल जाए तो सुकून से

खिदमत में फैला दे खुदा के

खाली अपने दोनों हाथ

कितने ही लोग हैं जिनके पास खाने के लिए कुछ नहीं है

फिर भी वे उपरवाले से तनीक भी नाराज नहीं है

जैसा मिला उसमे ही खुश हैं

उनकी सोच हमसे कितनी ऊंची है,हमें जितना मिला उसके

लिए ना हम कभी ईश्वर को धन्यवाद देते हैं,

बल्कि जो हमारे पास नहीं है उसकी बस शिकायत करते हैं

जो हमारे पास है ,वो तो बस किसी के लिए एक ख्वाब है

तो चलिए जिंदगी में कुछ अलग करे,

खुश रहने की सलाह ना देकर, किसी के खुशियो की क्यूँ ना वजह बने !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Sakshi Mutha

माँ

माँ

1 min पढ़ें

पापा

पापा

1 min पढ़ें

दोस्त

दोस्त

1 min पढ़ें

पापा

पापा

1 min पढ़ें

साथ

साथ

1 min पढ़ें

यादें

यादें

1 min पढ़ें

मजहब

मजहब

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Inspirational