STORYMIRROR

पौरूष परिहार

Drama

5.0  

पौरूष परिहार

Drama

मिलन

मिलन

1 min
835


इस कदर मेरा तेरा मिलन होगा

कि आत्मा का परमात्मा से मिलन होगा

बाराती बनेंगे, ये चादँ, ये तारे

ये सूरज, ये धरती, ये आसमाँ,


कि विवाह का हमारे

खुद गवाह खुदा होगा

लहू से अपने, माँग तेरी

ऐसी सजाऊँगा,

बनकर प्यार तेरे रग-रग में

उतर जाऊँगा

न फिर एहसासे-प्यार

जुदा होगा,


ना परवाह मुझे,

अपने इस

माटी के तन की,


आत्मा तो मेरी तुझमें है

फिर ये माटी

सुपूर्द -ए- खाक होगी।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from पौरूष परिहार

Similar hindi poem from Drama