मेरी पहली कविता और कशिश तुम
मेरी पहली कविता और कशिश तुम
आज मोहब्बत की गली में फिर खुद को तन्हा पाया
आज मैं तेरे प्यार में जैसे खुद को मरता पाया
मोहब्बत क्या है फिक्ररमंदी मक्कारी या खुद को कचोटना या खुद से नाराज़ रहना
मोहब्बत क्या है धोखा या बेबसी या खुद की गई सबसे बड़ी गलती
ये बारिश के बीच आज मैं खुद को भीगता पाया
आज मैं बारिश से खुद को महफूज करता भागता पाया
आज फिर से मैं लाचारी से दौड़ता नजर आया
तभी सामने एक जाली वाला मकान नजर आया
जिसमें मैं खुद को थकान मिटता नजर आया
तभी बारिश की धुंध में एक जाना पहचाना नजर आया
गौर से देखा तो बालकनी में कशिश का चेहरा नजर आया
जैसे ही मैंने नजरे कशिश से मिलाया था
उसने नजरे झुका खुद को बेहद आहत होता हुआ पाया था
जैसे ही नजरे मिली अंदर घर में आओ ऐसा उसने मुझे बुलाया था
उसकी फकत और मासूमियत चेहरे पे आज मुझे अजीब सा तड़प आया था
उसकी नजरे झुकी कमरे में बड़ी खालिस सा मैंने पाया था
मैंने उसकी चुप्पी तोड़ते हुए उसे अपनी ओर घूरता हुआ पाया था
पहले से तू इतनी हसीन या खुदा ने किया कोई सितम ऐसा मैंने उसे बताया था
उसने मुझे प्यार से झप्पी देते हुए हौले से मुस्कुराया था
उसने फिर कसके जकड़ मुझे प्यार से गले लगाया था
यह कैसा बियर्ड बढ़ा तूने कैसा अपना हुलिया बनाया था
फिर मैंने उसे अपने सीने से चिपके खुद से रोता हुआ पाया था
आज मैंने खुद को वक्त की उदासी और खुद को बड़ा लाचार रोता हुआ हमने पाया था
उसने फिर मेरे जेब से 10 रूप निकाल कैसे मुझे चिढ़ाया था
अब तो जा कमा नौकरी कर ऐसा मुझे बताया था।
मैंने एक ही टक उसे निढाल अपनी ओर ताकता हुआ पाया था
अब शिकायती नजरों से मुझे ना देखो अब ऐसे अनदेखा मुझको ना करो
पापा के कसम की खातिर मैंने किसी और से शादी का कदम उठाया था
मैंने शादी के दिन तेरे लिए खूब तड़पता हुआ पाया था
अब तो यही इरादा है बस तुमको ऐसे ही मुस्कुराते देख पाना है
तुम्हारे खूबसूरत जुल्फों को देख कल्पना में खो जाना है
तुम ऐसे ही सोए रहो मैं यूं ही चुपचाप तुम्हें देखता रहूं
तुम्हें एक पल में मैं जी भर के यूं ही देखता रहूं
अब खुद को संभालो भले हम प्यार नहीं
लेकिन कौन कहता है हम यार नहीं
बात जब भी आए कभी मेरी तो हमें भुला देना
अपनी कोई छोटी सी भूल वजह ऐसा बता देना
मेरी बाते कहानी किस्सा को धूल में उड़ा देना
आज मेरा कदम भारी भारी सा नजर आया है
जैसे लगता आज मेरे जिस्म से जान निकल आया है
मैं अब अपनी पहली कविता खत्म करता हूँ
मैं अपनी पहली कविता तुझे डेडिकेट करता हूँ

