STORYMIRROR

राजेश "बनारसी बाबू"

Action Others

3  

राजेश "बनारसी बाबू"

Action Others

टूटा तारा

टूटा तारा

1 min
266

टूट कर कोई तारा गिरा है

टूटने पे कितना दर्द होता

कोई ना फिक्र किया है

इंसान हरदम यहां स्वार्थ के लिए जिया है

तारे टूटते ही उन्हें खुशी हुआ है

सजदे में बैठ किसी को पाने की दुआ किया है

यहां लोग अपने के टूटने पे खुशी मनाते है

यही अपने लोग तुम्हारे शव को भी सबसे पहले जलाते है।

तुम्हें घर से विमुख कर तुम्हारे संपत्ति को अपनाते है

तुम्हारे शव के राख को गंगा में बहाते है।

जब तुम यहां टूटोगे कोई अपना नहीं दिखेगा

कोई अपना दिखेगा तो बस श्मशान या कब्रिस्तान ही दिखेगा

टूटते का यहां कोई संगी ना होता

बंदगी से यहां ख़ुदा नहीं मिलता 

टूट कर कोई तारा गिरा है।

आज फिर से कितना खुशी हुआ है

तारे टूटते ही किसी ने किसी को पाने की आरजू किया है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Action