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Amit Singhal "Aseemit"

Drama Classics Children

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Amit Singhal "Aseemit"

Drama Classics Children

मेरी बिटिया रानी बड़ी हो गई

मेरी बिटिया रानी बड़ी हो गई

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मेरी बिटिया रानी बड़ी हो गई।

ना जाने कब और कैसे हो गई।

सुंदर और सयानी बड़ी हो गई।

मेरी बिटिया रानी बड़ी हो गई।


घुटनों के बल चलती थी।

इशारों में बातें करती थी।

पूरे घर में सरपट घूमने लगी।

कभी गिरती कभी संभलने लगी।

एक दिन अचानक खड़ी हो गई।

मेरी बिटिया रानी बड़ी हो गई।


तोतली भाषा से ही सही।

मगर सब समझा देती थी।

दो तीन शब्दों से सबको।

सब कुछ बता देती थी।

अब तो बातूनी बड़ी हो गई।

मेरी बिटिया रानी बड़ी हो गई।


ठुमक ठुमक कर चलने लगी।

उंगली पकड़ कर घूमने लगी।

फिर तो घुमक्कड़ बड़ी हो गई।

हर जगह "मुझे भी जाना है"।

यह कहकर ज़िद करने लगी।

खुद तैयार होकर खड़ी हो गई।

मेरी बिटिया रानी बड़ी हो गई।


रोज़ चुन्नी की साड़ी पहनकर।

टीचर बनकर मुझे पढ़ाने लगी।

वक्त उसके स्कूल जाने का आया।

खुद रोते हुए स्कूल जाने लगी।

पढ़कर होशियार बड़ी हो गई।

मेरी बिटिया रानी बड़ी हो गई।


अब तो नोनू से "वृद्धि" हो गई।

छोटी बहन की दीदी हो गई।

छोटी बहन को पढ़ाने लगी।

"व्याख्या" को समझाने लगी।

छोटी बिटिया से बड़ी हो गई।

मेरी बिटिया रानी बड़ी हो गई।


मेरी बिटिया रानी बड़ी हो गई।

ना जाने कब और कैसे हो गई।

सुंदर और सयानी बड़ी हो गई।

मेरी बिटिया रानी बड़ी हो गई।


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