STORYMIRROR

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Drama Inspirational

4  

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Drama Inspirational

हे तात तुम्हें नमन

हे तात तुम्हें नमन

1 min
270

जनक हो तुम परम पिता हो

मेरे अस्तित्व के सृजक हो 


आंधी अन्धड़ धूप दोपहरी

तुम ही तो हो छत हमारी


अन्नदाता पालन करता

शिक्षा संस्कृति अरु पोषण कर्ता


जनक हो तुम परमपिता हो

मेरे अस्तित्व के सृजक हो 


अणु अणु में व्याप्त तुम्ही हो

सूक्ष्म वृहद तम प्रकाश तुम्ही हो


सुख दुःख दुनिया जीव अधारा 

सकल जगत के हो संकट हारा


जनक हो तुम परमपिता हो

मेरे अस्तित्व के सृजक हो 


एक हो अनेक हो प्रत्यय समर्थ हो

सारे संसार के सामने उदाहरण विशेष हो


तुम हो तो हम हैं हे तात परम सत्य हो

सृजनकारी पूज्य बापूजी जी प्रतीक हो


जनक हो तुम परमपिता हो

मेरे अस्तित्व के सृजक हो 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama