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Rachna Rani Sharma

Abstract Classics

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Rachna Rani Sharma

Abstract Classics

मौसम

मौसम

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ठिठुरा हुआ-सा सूरज, 

हौले-हौले से निकल रहा है। 

सहमी हुई-सी सुबह, 

मौसम बदल रहा है।।


ठहरे से ताल-तलैये, 

हलचल से डर रहे हैं। 

बगुलों की सुगबुगाहट, 

मौसम बदल रहा है।। 


ठण्डी-ठण्डी पवन भी, 

सुस्त-सी बह रही है। 

सर्दी से लग रहा है, 

मौसम बदल रहा है।।


पक्षियों की चहचाहट, 

जागने को कह रही है।

आँखों में भरी है निद्रा, 

मौसम बदल रहा है।। 


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