Ravi Purohit
Drama
गज़ल के मिसरे-सी
तुम्हारी मुस्कराहट
मेरे मन के संवेदी शेर को
रुहानी संगत देकर
अहसासों की
मुकम्मल ग़ज़ल कह जाती है
क्या यही प्यार है।
रंग मुबारक
तुम्हारी शीलत...
जी लेता हूं स...
सुनो खुशबू !
ओ मन बसंत
तलब
सुन रे बसंत !
मन झूमे-करे म...
सांस-भर सांस ...
सूरज को शास्त...
बिना परिश्रम किए, कभी भी हार मान मत। बिना परिश्रम किए, कभी भी हार मान मत।
देश के लिए लड़ना सिखाती है वह भूमि मां कहलाती है। देश के लिए लड़ना सिखाती है वह भूमि मां कहलाती है।
श्वेत रंग कहे शांति धरना, पावन भाव, प्रेम से बहना। श्वेत रंग कहे शांति धरना, पावन भाव, प्रेम से बहना।
बस दे दो एक टुकड़ा बादल का मुझे, तुम रख लो पूरा आसमान। बस दे दो एक टुकड़ा बादल का मुझे, तुम रख लो पूरा आसमान।
मेरे लिबास की सादगी देखकर लोग बनाकर रखते हैं मुझसे दूरियाँ मेरे लिबास की सादगी देखकर लोग बनाकर रखते हैं मुझसे दूरियाँ
लाल दिखाये, साहस तुझमें, आक्रामक भाव जागते जिसमें। लाल दिखाये, साहस तुझमें, आक्रामक भाव जागते जिसमें।
बंजर प्यासी धरती हरियाली को तरसती हैl ठूँठ की चिड़िया जल बिन मछली सी तड़पती है l बंजर प्यासी धरती हरियाली को तरसती हैl ठूँठ की चिड़िया जल बिन मछली सी तड़पती है ...
देवों की आराध्य तू देवी, तुझसे आरम्भ और अंत भी तू ही॥ देवों की आराध्य तू देवी, तुझसे आरम्भ और अंत भी तू ही॥
मेरी गुणवत्ता की पहचान करने के तरीके तलाशते हो, मेरी गुणवत्ता की पहचान करने के तरीके तलाशते हो,
अच्छी कविता होने पर मुझको देती शाबाशी थी अच्छी कविता होने पर मुझको देती शाबाशी थी
पेड़-पौधों की बनाये, हम सब सुंदर सी क्यारी वो कार्बन-उत्सर्जन के है, बहुत बड़े शिकारी पेड़-पौधों की बनाये, हम सब सुंदर सी क्यारी वो कार्बन-उत्सर्जन के है, बहुत बड़े ...
पहले मकान कच्चे थे, पर मन थे, मजबूत आज हवा ऐसी चल रही है, घर रहे है, टूट पहले मकान कच्चे थे, पर मन थे, मजबूत आज हवा ऐसी चल रही है, घर रहे है, टूट
सब इस पर जान लुटाएंगे, हर घर सब फहरायेंगे।। सब इस पर जान लुटाएंगे, हर घर सब फहरायेंगे।।
वो मुखौटों में छुपे हुए कुछ 'खुदगर्ज़ी' से भरे चेहरे थे. वो मुखौटों में छुपे हुए कुछ 'खुदगर्ज़ी' से भरे चेहरे थे.
आंखों में चमक और दिल में जोश तो, होगी मंजिल भी नजदीक आंखों में चमक और दिल में जोश तो, होगी मंजिल भी नजदीक
सात अरब से भी अधिक जनता, हर मानव की कोई न कोई समस्या वास्तविक या काल्पनिक। सात अरब से भी अधिक जनता, हर मानव की कोई न कोई समस्या वास्तविक या क...
कोई मरता कर्ज में दबकर कहीं करोड़ों के कर्ज माफ होते गए।। कोई मरता कर्ज में दबकर कहीं करोड़ों के कर्ज माफ होते गए।।
दिन दोपहर में लाइट का जाना बरगद के पेड़ के नीचे बैठे हर एक मुंह से सुनी कहानी दिन दोपहर में लाइट का जाना बरगद के पेड़ के नीचे बैठे हर एक मुंह से सुनी कहानी
क्रोध अवस्था भ्रम अवस्था हो, बुद्धि भ्रष्ट, अभिमानी पतन की क्रिया शुरू है, क्रोध अवस्था भ्रम अवस्था हो, बुद्धि भ्रष्ट, अभिमानी पतन की क्रिया शुरू है,
कद्र करो, यहां तुम बस खुद की भद्र रहो, जैसे होती कोई कौमुदी कद्र करो, यहां तुम बस खुद की भद्र रहो, जैसे होती कोई कौमुदी