Ravi Purohit
Drama
गज़ल के मिसरे-सी
तुम्हारी मुस्कराहट
मेरे मन के संवेदी शेर को
रुहानी संगत देकर
अहसासों की
मुकम्मल ग़ज़ल कह जाती है
क्या यही प्यार है।
रंग मुबारक
तुम्हारी शीलत...
जी लेता हूं स...
सुनो खुशबू !
ओ मन बसंत
तलब
सुन रे बसंत !
मन झूमे-करे म...
सांस-भर सांस ...
सूरज को शास्त...
साथ निभाने का करके वादा साथ छोड़ वो चले जाते हैं साथ निभाने का करके वादा साथ छोड़ वो चले जाते हैं
शायद मैं उसके योग्य नहीं उसे यह दीपक नहीं, दूसरा सूर्य मिले ! शायद मैं उसके योग्य नहीं उसे यह दीपक नहीं, दूसरा सूर्य मिले !
खुले नीलाम्बर की चादर,रंग-बिरंगे रंगों की दुनिया के प्रेमपाश में कैद हो गयी दुनिया सारी खुले नीलाम्बर की चादर,रंग-बिरंगे रंगों की दुनिया के प्रेमपाश में कैद हो गयी दुनि...
खिली थी चाँदनी नभ में वही रुत अब सुहानी याद आती हैं खिली थी चाँदनी नभ में वही रुत अब सुहानी याद आती हैं
दिल के कोने में छिपे जज़्बात की कोई आवाज तो होगी, दिल के कोने में छिपे जज़्बात की कोई आवाज तो होगी,
जब राम थे तब भी ऊंगली उठाई गई जनक दुलारी पर.. और अब जबकि....! जब राम थे तब भी ऊंगली उठाई गई जनक दुलारी पर.. और अब जबकि....!
अब न कंधे पर मित्र हाथ तेरा बिछड़ गया है, प्रिय दोस्त मेरा अब न कंधे पर मित्र हाथ तेरा बिछड़ गया है, प्रिय दोस्त मेरा
लक्ष्मण बने है शेषनाग जी स्वयं विष्णु ही नर रूप में आया।। लक्ष्मण बने है शेषनाग जी स्वयं विष्णु ही नर रूप में आया।।
मैं, माँ की चटाई बिछाकर माँ का चश्मा लगाती हूँ और माँ की किताबों में खोजती हूँ माँँ...! मैं, माँ की चटाई बिछाकर माँ का चश्मा लगाती हूँ और माँ की किताबों में खोजती हू...
जो सत्यपथ का होता है, जानकार वो चलचित्र होता प्रसिद्धि हकदार जो सत्यपथ का होता है, जानकार वो चलचित्र होता प्रसिद्धि हकदार
कभी मेरे चरित्र पर तो कभी उनके किरदार पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया कभी मेरे चरित्र पर तो कभी उनके किरदार पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया
धड़कनें भी जाने कब दग़ा दे जाएँ सांसें भी मेहमान हैं कुछ पल की धड़कनें भी जाने कब दग़ा दे जाएँ सांसें भी मेहमान हैं कुछ पल की
जो लोग यहां पर खुद्दारी से जिया करते है।। वो आदमी यहां पर कामयाबी से मिलते है। जो लोग यहां पर खुद्दारी से जिया करते है।। वो आदमी यहां पर कामयाबी से मिलते है...
कोई यहां स्वार्थी इंसानों से दुःखी है कोई अपने आप से ही बहुत दुःखी है कोई यहां स्वार्थी इंसानों से दुःखी है कोई अपने आप से ही बहुत दुःखी है
रूबरू कराये जो हक़ीक़त से ऐसी बात नहीं बहुत बदला है पर फिल्मों का लगाव वही रूबरू कराये जो हक़ीक़त से ऐसी बात नहीं बहुत बदला है पर फिल्मों का लगाव वही
एक ओर हरा-भरा गाँव बजती हैं जानवरों के गले की घंटियाँ चरवाहों की हँसी के साथ दूसरी ओर रिसता है पीपल ... एक ओर हरा-भरा गाँव बजती हैं जानवरों के गले की घंटियाँ चरवाहों की हँसी के साथ दूस...
थेथर की तरह पसरी रहती हूँ अक्सर। थेथर की तरह पसरी रहती हूँ अक्सर।
इल्म हुआ मुझे सबसे खूबसूरत है इश्क का अख़्तर होना इल्म हुआ मुझे सबसे खूबसूरत है इश्क का अख़्तर होना
स्मृतियों के दिव्य गगन के सूर्य शिरोमणि! ऊर्जा बन, करते मन में संचार पिताजी।। स्मृतियों के दिव्य गगन के सूर्य शिरोमणि! ऊर्जा बन, करते मन में संचार पिताजी।।
तू सही है, न दे जग को हिसाब वो खुदा दिखाएगा करामात तू सही है, न दे जग को हिसाब वो खुदा दिखाएगा करामात