क्या सखि साजन ?
क्या सखि साजन ?
शरीर है नई उजली किरण।
स्वभाव इसका जैसे हिरण।
वाणी मधु जैसे हो गायक।
क्या सखि साजन ? ना सखि नायक।
सजाऊं इसे मैं सुबह शाम।
इसके बिन होता नहीं काम।
स्नेह कर आता मुझे तेवर।
क्या सखि साजन ? ना सखि ज़ेवर।

