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Kumar Vikash

Drama

5.0  

Kumar Vikash

Drama

कुछ अपने बारे में

कुछ अपने बारे में

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मैं लिखता हूँ

इसमें मेरी तारीफ नहीं,


तारीफ तो उन बहारों, नजारों,

और हालातों की है !


जो मुझे लिखने के लिये

हर पल, हर लम्हा

प्रेरित करते हैं,


न ये बहारें होतीं

न ये नज़ारे होते

और न ये हालात होते !


तो क्या लिखता

कोई कवि, शायर,

गज़लकार या फ़नकार,


कलम कहीं पड़ी होती कोने में

और कागज़ हवा में उड़ रहे होते !


जो हम लगाते हैं

विचारों के सागर में आज गोते,


डूब कर अँधेरों में

कल कहीं गुम हो गये होते !!


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