कुछ अपने बारे में
कुछ अपने बारे में
मैं लिखता हूँ
इसमें मेरी तारीफ नहीं,
तारीफ तो उन बहारों, नजारों,
और हालातों की है !
जो मुझे लिखने के लिये
हर पल, हर लम्हा
प्रेरित करते हैं,
न ये बहारें होतीं
न ये नज़ारे होते
और न ये हालात होते !
तो क्या लिखता
कोई कवि, शायर,
गज़लकार या फ़नकार,
कलम कहीं पड़ी होती कोने में
और कागज़ हवा में उड़ रहे होते !
जो हम लगाते हैं
विचारों के सागर में आज गोते,
डूब कर अँधेरों में
कल कहीं गुम हो गये होते !!
