STORYMIRROR

Kumar Vikash

Drama

2  

Kumar Vikash

Drama

सितमगर

सितमगर

1 min
185

वो औरों की खुशी,

मेरे गम बन गये हैं।


हमदम थे जो,

कल तक मेरे।

वो आज,

सितमगर बन गये हैं।


बुझा कर

मेरे दिल से,

चाहत का दीया।

अब घर किसी और का,

रोशन करने गये हैं।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama