PRIYANKA Balsure
Drama
हैं आंसुओं की बूंदें
हैं या आँखों की नमी है,
न ऊपर आसमां है
न नीचे ज़मीन है
यह कैसा मोड़ है ज़िन्दगी का
उसी की ज़रूरत है,
और उसी की कमी है।
जिंदगी
भगवान् था, शैतान था, हैवान था, ज़िंदा होकर भी...वो बेजान था। भगवान् था, शैतान था, हैवान था, ज़िंदा होकर भी...वो बेजान था।
इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी। इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी।
इस कम्प्यूटर युग में उसके सपनों का महत्व ही क्या है ! इस कम्प्यूटर युग में उसके सपनों का महत्व ही क्या है !
मेरे हालात का क्या तुझे हैं पता ? आज तू मुझे सच में ये बता...! मेरे हालात का क्या तुझे हैं पता ? आज तू मुझे सच में ये बता...!
कुछ पाने की उम्मीद लेकर अंधेरे में ही चल देता है वो। कुछ पाने की उम्मीद लेकर अंधेरे में ही चल देता है वो।
माँ की कितनी बात सुनाऊँ, ममता की प्रतिमूर्ति ऐसी, देवी छोटी पड़ जाती है, धरती पे माँ कहलाती है। माँ की कितनी बात सुनाऊँ, ममता की प्रतिमूर्ति ऐसी, देवी छोटी पड़ जाती है, धरती प...
जद्दोजहद इस, बात की है खुद से, की मैं खुदा से माँगू, या भगवान से माँगू...! जद्दोजहद इस, बात की है खुद से, की मैं खुदा से माँगू, या भगवान से माँगू...!
हाँ नही बनी मैं कविता के लिए इसलिए कथा लिख जाती हूँ। हाँ नही बनी मैं कविता के लिए इसलिए कथा लिख जाती हूँ।
इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है
एक वादा करना हैं तुमसे, एक घर बनाना हैं अपना...! एक वादा करना हैं तुमसे, एक घर बनाना हैं अपना...!
ऊपर वाले का कोई कसूर हूँ ! हाँ, मैं एक मजदूर हूँ, मैं मजदूर हूँ ! ऊपर वाले का कोई कसूर हूँ ! हाँ, मैं एक मजदूर हूँ, मैं मजदूर हूँ !
गर एक क्षण भी मिला नहीं हूँ, फिर सौ बार मिलूँगा मैं... गर एक क्षण भी मिला नहीं हूँ, फिर सौ बार मिलूँगा मैं...
ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं देता। ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं द...
अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर ! अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर !
क्यूँकि वो नाजायज़ था क्यूँकि वो नाजायज़ था
क्या दिया है इस, लड़कपन के प्यार ने ? क्या दिया है इस, लड़कपन के प्यार ने ?
छोड़ दिया था उस, बच्ची का हाथ आपने, जब वो थी अपनी माँ के कोख़ में...! छोड़ दिया था उस, बच्ची का हाथ आपने, जब वो थी अपनी माँ के कोख़ में...!
किसी के आँसू पोछोगे जब, पास मुझे ही पाओगे...! किसी के आँसू पोछोगे जब, पास मुझे ही पाओगे...!
मुझ से क्या पूछते हो, पता इश्क़ की उन बस्तियों का, मैं ख़ुद भटका हुआ हूँ, उसकी वीराना गलियों में..... मुझ से क्या पूछते हो, पता इश्क़ की उन बस्तियों का, मैं ख़ुद भटका हुआ हूँ, उसकी...
थी मेरी भी एक दुनिया जिसमें, एक दोस्त से रंगत थी...! थी मेरी भी एक दुनिया जिसमें, एक दोस्त से रंगत थी...!