STORYMIRROR

Priyanka Saxena

Drama Others

3  

Priyanka Saxena

Drama Others

होली ऐसे कैसे हो ली!

होली ऐसे कैसे हो ली!

1 min
238

होली की मस्ती हो, धमाल हो, कुछ कमाल हो,

रंग से सराबोर हो, गुलाल की फुहार हो,

मस्ती का आलम हो, भांग का खुमार हो,

गुजिया की मिठास हो, दही बड़े की चाट हो,

कांज़ी का तीखापन हो, साथ एक पैग का हो,

रंग से लिपे पुते हम भी कभी इस महफ़िल की रौनक थे।

अभी तो इक टीका गुलाल का और लो जी हो गयी होली।

होली ऐसे कैसे हो ली! समझ से परे है?

इस सूखे प्रदेश में होली भी फीकी है,

मज़ा तो यारों, अपने देश व लोगों के साथ ही है होली का,

होली के रंग बिरंगे रंगो का,

जहां तन मन से होली का लुत्फ उठाया करते थे।

कभी हम भी होली मनाया करते थे।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama