STORYMIRROR

Kanchan Prabha

Romance Tragedy Classics

4  

Kanchan Prabha

Romance Tragedy Classics

कशिश उस आवाज की

कशिश उस आवाज की

1 min
364

आज शब्द

क्यों नहीं मिल रहे

लिखना तेरे लिए 

पर लिख नहीं पा रही

आज ये क्या हुआ


हाथ क्यों नहीं चल रहे

शब्द क्यों नि:शब्द पड़े

आँखे बोझिल होने लगी

तुम्हारी आवाज

पल पल गूँज रही कानों में 


इस लिए शायद

मैं लिख नहीं पा रही

तुम ख्यालों में घूम रहे हो

तुम निगाहों में तैर रहे हो

हृदय में नजरों में 


गूँज रही हर जगह

बस तुम्हारी आवाज

कशिश से भरी

मैं वही सोचती जा रही

सुनती जा रही


जागने से सोने तक

इस लिए शायद

आज मैं लिख नहीं पा रही।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance