कृष्ण और गणेश जयंती
कृष्ण और गणेश जयंती
एक तरफ है नटखट नंदकुमार,
एक तरफ है गजानन प्यारे।
भाद्रभद के महीने इस साल,
लगते हैं इन लालनों सबसे न्यारे।
आओ मनाएँ मिलकर उत्सव
दोनों देवों का एक साथ ।
एक के हाथ में मुरली,
मुकुट में मयूर के पंख,
गले में सुगंध माला,
कमर में रश्मि पीतांबर ।
सिखाते मक्खन चुराना मित्रों को,
दिखाते मूंह में विश्व यशोदा को ,
सिखाते प्यार वृंदावन गोपियों को,
दिखाते गुरुक्षेत्र में विश्वरूप अर्जुन को।
गलियों में लटक जाते हैं दही हांडी,
युवा बन जाते हैं मानव पिरामिड।
मटका फूट, बिखरे, माखन नहीं, सिक्के,
पानी की बौछारें जब गिरती ,
भक्तों की भक्त और निखरती ।
दस दिनों में सजेंगे मंडप सुंदर,
गणेश मूर्तियों का खूब प्रदर्शन,
" गणपति बप्पा मोरया" से,
हर गलियों में गूंज उठेगा।
एक हाथ में मोदक,
एक में हाथीदांत की लेखनी,
शरीर के ऊपर गजमुख,
नीचे तौंद निकली हुई पेट।
ये भी सिखाते बुद्धि मानव को,
दिखाते मां-बाप से मिला ज्ञानफल को।
चलो मनाएंगे कृष्ण और गणपति का,
हम सब मिलकर गुणगान गाएँ।
